Saturday, 23 February 2013
Saturday, 16 February 2013
chiriya
तिनके चुनकर लाती चिरिया ,
अपना नीर बनाती चिरिया .
चाहे मुन्ना हो या मुनिया ,
चाहे गुड्डा हो या गुरिया .
घर घर की गौरैया बनकर ,
सबके मन बहलाती चिरिया .
घर में , वन में और फूलो पर ,
डाली के हिलते झूलों पर ,
कभी फुदककर नाच दिखाती ,
कभी गीत -सा गाती चिरिया .
इसको पिंजरे में मत डालो ,
खुला छोरकर इसको पालो ,
आजादी की खुली हवा में .
अपने पर फैलाती चिरिया .
अपना नीर बनाती चिरिया .
चाहे मुन्ना हो या मुनिया ,
चाहे गुड्डा हो या गुरिया .
घर घर की गौरैया बनकर ,
सबके मन बहलाती चिरिया .
घर में , वन में और फूलो पर ,
डाली के हिलते झूलों पर ,
कभी फुदककर नाच दिखाती ,
कभी गीत -सा गाती चिरिया .
इसको पिंजरे में मत डालो ,
खुला छोरकर इसको पालो ,
आजादी की खुली हवा में .
अपने पर फैलाती चिरिया .
chanda mama
आ रे ,चंदा मामा आ ,
अपनी विमल चाँदनी ला .
धरती पर अँधियारा है ,
तू उजियारा लेकर आ .
खीर पकाई है माँ ने ,
जल्दी से आकर खा जा .
माँ भी खुश हो जाएगी ,
तभी बजाउंगा बाजा .
किरणों की डोरी थामे ,
अंबर से नीचे तो आ .
तू माँ का भैया है तो ,
जल्दी मेरे घर आ जा .
अपनी विमल चाँदनी ला .
धरती पर अँधियारा है ,
तू उजियारा लेकर आ .
खीर पकाई है माँ ने ,
जल्दी से आकर खा जा .
माँ भी खुश हो जाएगी ,
तभी बजाउंगा बाजा .
किरणों की डोरी थामे ,
अंबर से नीचे तो आ .
तू माँ का भैया है तो ,
जल्दी मेरे घर आ जा .
Friday, 15 February 2013
suraj
धीरे धीरे सूरज गोल ,
पृथ्वी की पूरब की ओर .
लाली को बिखराता है .
सूरज ऐसे आता है .
उठ जाता है जग सारा ,
दृश्य कितना होता प्यारा .
दिन फिर सीढ़ी चढ़ता है ,
सूरज ऐसे बढ़ता है .
पृथ्वी की पूरब की ओर .
लाली को बिखराता है .
सूरज ऐसे आता है .
उठ जाता है जग सारा ,
दृश्य कितना होता प्यारा .
दिन फिर सीढ़ी चढ़ता है ,
सूरज ऐसे बढ़ता है .
तितली रानी
रंग बिरंगी तितली रानी ,
पास मेरे तुम आओ .
लाई हु मै मक्खन -रोटी ,
थोरी -सी खा जाओ .
फर -फर इधर -उधर उरना तुम ,
मुझको जरा सिखा देना .
फूलो से क्या बाते करती
मुझको भी बतला देना .
फूलो का मीठा रस तुम,
कौन -से घर में रखती हो .
मेरे मक्खन-रोटी को तुम ,
तनिक क्यों नहीं चखती हो
आ जाओ अब देर करो मत ,
अब न करेंगे तुमको तंग .
छूकर देखेंगे पर तेरे ,
खेलेंगे हम तेरे संग .
रंग बिरंगी तितली रानी ,
पास मेरे तुम आओ .
लाई हु मै मक्खन -रोटी ,
थोरी -सी खा जाओ .
फर -फर इधर -उधर उरना तुम ,
मुझको जरा सिखा देना .
फूलो से क्या बाते करती
मुझको भी बतला देना .
फूलो का मीठा रस तुम,
कौन -से घर में रखती हो .
मेरे मक्खन-रोटी को तुम ,
तनिक क्यों नहीं चखती हो
आ जाओ अब देर करो मत ,
अब न करेंगे तुमको तंग .
छूकर देखेंगे पर तेरे ,
खेलेंगे हम तेरे संग .
kritiman sthapit karegi meera kumar
लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष एवं वयोवृद्ध कांग्रेसी नेता बलिराम भगत का कहना है कि लोकसभा की नई अध्यक्ष मीरा कुमार उनकी बेटी के समान हैं और वे अपने कार्यकाल में नए कीर्तिमान कायम करेंगी।
87 वर्षीय भगत ने बताया कि कुमार उनकी बेटी के साथ दिल्लीविश्वविद्यालय के इंद्रप्रस्थ कॉलेज में पढ़ती थी और उनके पिता और पूर्व उप प्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम से उनका निकट का संबंध था। एक तरह से वे उनके परिवार का सदस्य थे।
भगत ने कहा कि पूर्व उप प्रधानमंत्री के कहने पर ही वे आरा से चुनाव लड़ने लगे और जगजीवन राम आरा छोड़कर सासाराम से चुनाव लड़ने लगे थे।
वर्ष 1976 में लोकसभा अध्यक्ष रहे भगत ने कहा कि मीरा को मैंने बचपन से देखा है वे मेरे सामने बड़ी हुई है। वे शुरू से ही बहुत शांत एवं विनम्र स्वभाव की रही है।
उन्होंने कहा कि अध्यक्ष के लिए बहुत जरूरी है कि वह धैर्यवान हो और स्वभाव से शांत हो तथा किसी बात पर उत्तेजित न हो। मीरा में यह गुण कूट-कूट कर भरा है।
एक आईएफएस अधिकारी के रूप में वे अपनी योग्यता पहले ही सिद्ध कर चुकी है। एक मंत्री के रूप में उनकी छवि ईमानदार रही है। उन्होंने कहा कि खुशी है कि मेरे बाद बिहार को करीब 33 साल के पश्चात यह गौरव बाद प्राप्त हुआ है।
राजस्थान एवं हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल रह चुके भगत ने आशा व्यक्त की कि पन्द्रहवीं लोकसभा में इतना हंगामा नहीं होगा क्योंकि बहुत नकारात्मक छवि वाले नेता इस बार चुनाव हार गए हैं और उनके नहीं रहने से संसद की कार्यवाही अपेक्षाकृत शांत रहेगी और मीरा कुमार को कोई मुश्किल नहीं होगी। वे अपनी निष्पक्ष और पारदर्शी शैली से नया कीर्तिमान बनायेगी।
सात अक्टूबर 1922 में पटना में जन्मे बलिराम भगत 1956 में पंडित नेहरू के मंत्रिमंडल में उपमंत्री रह चुके हैं और 1969 में वे कैबिनेट मंत्री बने।
87 वर्षीय भगत ने बताया कि कुमार उनकी बेटी के साथ दिल्लीविश्वविद्यालय के इंद्रप्रस्थ कॉलेज में पढ़ती थी और उनके पिता और पूर्व उप प्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम से उनका निकट का संबंध था। एक तरह से वे उनके परिवार का सदस्य थे।
भगत ने कहा कि पूर्व उप प्रधानमंत्री के कहने पर ही वे आरा से चुनाव लड़ने लगे और जगजीवन राम आरा छोड़कर सासाराम से चुनाव लड़ने लगे थे।
वर्ष 1976 में लोकसभा अध्यक्ष रहे भगत ने कहा कि मीरा को मैंने बचपन से देखा है वे मेरे सामने बड़ी हुई है। वे शुरू से ही बहुत शांत एवं विनम्र स्वभाव की रही है।
उन्होंने कहा कि अध्यक्ष के लिए बहुत जरूरी है कि वह धैर्यवान हो और स्वभाव से शांत हो तथा किसी बात पर उत्तेजित न हो। मीरा में यह गुण कूट-कूट कर भरा है।
एक आईएफएस अधिकारी के रूप में वे अपनी योग्यता पहले ही सिद्ध कर चुकी है। एक मंत्री के रूप में उनकी छवि ईमानदार रही है। उन्होंने कहा कि खुशी है कि मेरे बाद बिहार को करीब 33 साल के पश्चात यह गौरव बाद प्राप्त हुआ है।
राजस्थान एवं हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल रह चुके भगत ने आशा व्यक्त की कि पन्द्रहवीं लोकसभा में इतना हंगामा नहीं होगा क्योंकि बहुत नकारात्मक छवि वाले नेता इस बार चुनाव हार गए हैं और उनके नहीं रहने से संसद की कार्यवाही अपेक्षाकृत शांत रहेगी और मीरा कुमार को कोई मुश्किल नहीं होगी। वे अपनी निष्पक्ष और पारदर्शी शैली से नया कीर्तिमान बनायेगी।
सात अक्टूबर 1922 में पटना में जन्मे बलिराम भगत 1956 में पंडित नेहरू के मंत्रिमंडल में उपमंत्री रह चुके हैं और 1969 में वे कैबिनेट मंत्री बने।
Sunday, 10 February 2013
Subscribe to:
Comments (Atom)
