तिनके चुनकर लाती चिरिया ,
अपना नीर बनाती चिरिया .
चाहे मुन्ना हो या मुनिया ,
चाहे गुड्डा हो या गुरिया .
घर घर की गौरैया बनकर ,
सबके मन बहलाती चिरिया .
घर में , वन में और फूलो पर ,
डाली के हिलते झूलों पर ,
कभी फुदककर नाच दिखाती ,
कभी गीत -सा गाती चिरिया .
इसको पिंजरे में मत डालो ,
खुला छोरकर इसको पालो ,
आजादी की खुली हवा में .
अपने पर फैलाती चिरिया .
अपना नीर बनाती चिरिया .
चाहे मुन्ना हो या मुनिया ,
चाहे गुड्डा हो या गुरिया .
घर घर की गौरैया बनकर ,
सबके मन बहलाती चिरिया .
घर में , वन में और फूलो पर ,
डाली के हिलते झूलों पर ,
कभी फुदककर नाच दिखाती ,
कभी गीत -सा गाती चिरिया .
इसको पिंजरे में मत डालो ,
खुला छोरकर इसको पालो ,
आजादी की खुली हवा में .
अपने पर फैलाती चिरिया .
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